Girls Hindi Motivation Problems Uncategorized Women

पंडिताइन अम्मा की दवाई है, बेटा जरूर होगा….

दोस्तों आज की कहानी समाज की उस दूषित मानसिकता को दर्शाने वाली है जिसके चंगुल से अच्छे भले पढ़े लिखे लोग भी नहीं बच पाते हैं। इस कहानी का शीर्षक है- अम्मा की दवाई)

अम्मा की दवाई 

पंडिताइन अम्मा के घर के बाहर सुबह से ही भीड़ लग जाती थी। अच्छे-अच्छे लोग उनसे दवाई लेने आते थे। उनकी दवाई खाकर बहुतों के कुल का चिराग जला था। पंडित जी के गुज़र जाने के बाद से दवाई देने के इस काम में अम्मा की बढ़िया कट रही थी। इस काम में इज्ज़त की इज्ज़त और पैसा, वो तो छप्पर फाड़ के आ रहा था।

Source : Image from pexels.com

पंडिताइन अम्मा ये दवाई बनाती थीं और उनकी एक सहायिका ये कहकर दवाई देती थी कि ये पंडिताइन अम्मा की दवाई है, बेटा जरूर होगा। 

अनीता की सास भी अनीता को लेकर पंडिताइन अम्मा के यहां आईं थीं। 8 साल बाद अनीता फिर से गर्भवती हुई थी। उसकी 8 साल की बेटी थी। बहुत पूजा-पाठ, व्रत-उपवास और इलाज के बाद उसे दोबारा मां बनने का सुख मिल रहा था तो जाहिर था उसे लेकर चिंता भी ज्यादा थी।

Source: Image from freeimages.com

अब तक लाखों रुपए उसके इलाज में जा चुके थे। उसकी सास ने जो पूजा पाठ करवाई थी, जाने कहां कहां से पंडित बुलाकर, उसका हिसाब अलग था। इतना ज्यादा खर्च करने के बाद अगर अनीता को एक और बेटी हो जाती, तो घरवालों का नुकसान बहुत ज्यादा हो जाता। 

c

अनीता की सास उसका बहुत ध्यान रख रहीं थीं। बस उनकी एक ही फरमाइश थी कि बेटा ही होना चाहिए। इसी इच्छा के चलते अनीता की सास को पंडिताइन अम्मा का पता मिल गया। बस फिर क्या था, पहुंच गई वो भी अपनी बहू को लेकर, अनीता के लाख समझाने के बाद भी उसकी सास पर कोई असर नहीं था।

अम्मा की दवाई तक पहुंचते-पहुंचते दोपहर हो चुकी थी। अनीता को चक्कर आने लगे। उसने अपनी सास को कहा, “मुझसे अब और खड़ा ना हुआ जाएगा। आप जाकर दवाई ले लो।” 

अनीता की सास गुस्से में बोलीं,”दूध और पूत बहुत मुश्किल से मिलते हैं। बेटे की मां ऐसे ही नहीं बन जाओगी। थोड़ा धैर्य रखो। हमारी बारी आने ही वाली है। वो किसी और को दवाई नहीं देती हैं। जिसका बच्चा है, उसे ही देती हैं।” अनीता के पास उनकी बेतुकी बात मानने के अलावा कोई रास्ता नहीं था। 

आखिरकार अनीता की बारी आई। पंडिताइन अम्मा की सहायिका ने अनीता को दवाई दी, खाने का तरीका बताया और 2-4 ज्ञान की बातें बताने के बाद कहा, “आप बहुत भाग्यशाली हैं, आपको तो बेटा जरूर होगा। ये दवाई अम्मा जी ने अपनी बहू के लिए बनाई थी। दो खुराक थी, इसलिए एक उन्होंने आपको दिलवा दी।” अनीता से ज्यादा उसकी सास खुश थीं कि भगवान की कितनी कृपा है उन पर, कितना बढ़िया संयोग है। 

आज अनीता अस्पताल में भर्ती हुई। उसका ऑपरेशन होना था। ओटी बिजी था इसलिए उसे वार्ड में लिटाया गया था। बगल के वार्ड में जोर जोर से चिल्लाने की आवाजें आ रहीं थीं। अनीता की सास से रहा ना गया, वो जिज्ञासावश बगल के वार्ड में जा पहुंची। जाकर देखा तो, एक महिला गोद में छोटा सा बच्चा लिए रो रही थी। 

पंडिताइन अम्मा उस पर जोर-ज़ोर से चिल्ला रहीं थीं, “दवा खाने में नखरे करोगी तो यही होगा।” अनीता की सास पंडिताइन अम्मा को देखते ही बोली, “क्या हुआ अम्मा जी? आप इतने गुस्से में क्यों है?”  

Source: Image from freeimages.com

अम्मा का गुस्सा सातवें आसमान पर था। वो बोली, “क्या बताऊं आपको, ये मेरी इकलौती बहू है। दवाई बनाकर दी थी इसको, फेंक दी होगी कहीं, एक बेटी पहले से थी, एक और हो गई, सब अपने मन के हैं। देख लो, मेरी बात ना मानने का नतीजा। “अम्मा की बहू सुबकते हुए बोली, “अम्मा मेरी बात का विश्वास करो। आपने जैसे-जैसे बोला था, मैंने वैसे-वैसे दवाई खाई थी।” “चुप कर एक तो गलती करती है, ऊपर से जुबान चलाती है। नाम बदनाम करके रख दिया मेरा। “अम्मा गुस्से में चिल्ला रहीं थीं”।  

अनीता के सास बहुत तनाव में आ गईं। वो भागी-भागी अनीता के कमरे में आईं और बोलीं, “तुमने तो ठीक से दवाई खाई थी ना?” अनीता ने ज्यादा तकलीफ होने का बहाना किया और बात को टाल दिया।

अनीता ओटी में चली गई। थोड़ी देर बाद नर्स आकर बोली, “बधाई हो, बेटा हुआ है।” अनीता की सास खुशी से उछल पड़ीं। वो भागी-भागी पंडिताइन अम्मा से बताने आई और उनके पैरों को छूकर उन्हें धन्यवाद दिया। 

अम्मा उनके सामने ही अपनी बहू को डांटने लगीं, “सीखो कुछ, दूसरे मेरी बात मानते हैं और तुम, पालो अब दो-दो बेटियां।”

दो दिन बाद जब अनीता थोड़ा चलने फिरने लगी। तो वो खुद ही पंडिताइन अम्मा की बहू के वार्ड में चलकर गई और अम्मा के हाथ में एक लिफाफा रख दिया। पीछे-पीछे उसकी सास भी आ गईं। 

अनीता बोली, “अम्मा जी, ये लीजिए आपकी दवाई, सच पूछो तो, इसे मैंने भी नहीं खाया था क्योंकि मैं इन ढकोसलो में विश्वास नहीं करती। आज अगर मुझे दूसरी भी बेटी होती, तो मैं उसकी परवरिश बेटे से कम नहीं करती। 

बेटी या बेटा होना किसी के हाथ में नहीं होता। ये तो ईश्वर की कृपा होती है। अगर ये भी इंसान के हाथ में होता, तो इस दुनिया में ना तो आप होती और ना ही मैं, क्योंकि सबको बेटा ही तो चाहिए और रही बात आपकी दवाई की, तो ये मीठी गोली देकर लोगों को लूटना बंद कीजिए। क्योंकि इससे शुगर बढ़ता है, वंश नहीं।

Source: Image from freeimages.com

आपके घर में लक्ष्मी आई है। आपका भाग्य बनकर, इनका स्वागत कीजिए, अपमान नहीं। 

अनीता की सास नजरें झुकाए अपनी गलती का आभास कर रहीं थीं और अनीता अपने कमरे में आकर अपनी बड़ी बेटी को पुचकार रही थी, जिसकी गोद में उसका छोटा भाई था।

प्रज्ञा अखिलेश 

(आज की कहानी पढ़कर आप इसपर कितना विश्वास करेंगेमैं नहीं जानती लेकिन क्या गाँव क्या शहर ? यहाँ तक कि इंटरनेट तक ऐसे ढकोसले से भरे पड़े हैं। लेकिन सच पूछो तो ऐसी कोई दवाई बनी ही नहीं है जो माँ के पेट में जाकर बच्चे का लिंग निर्धारित करे। अगर ऐसा होता तो बेटी किसी के घर में जन्म ही ना लेती क्योंकि सबको बेटा ही तो चाहिए।)

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

%d bloggers like this: